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जालोर में 5 कॉलोनियों के लोग घरों में कैद, महिलाएं बोलीं – बेटी की डिलीवरी के बाद इलाज के लिए परेशानी

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जिले के 5 कॉलोनियों के लोग घरों में कैद महसूस कर रहे हैं, जिससे नागरिक जीवन और दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। खासकर महिलाएं इस स्थिति से चिंतित हैं। स्थानीय महिलाओं ने बताया कि उनकी बेटी की तीन दिन पहले डिलीवरी हुई है, लेकिन इलाज और दवाओं के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।

स्थानीय निवासी रेखा देवी ने कहा, “बच्चे की जन्म के बाद उसे चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत है। लेकिन हम घरों में कैद हैं और बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया है। प्रशासन से अपील है कि हमें सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”

सूत्रों के अनुसार, इस स्थिति के पीछे सड़क और यातायात अवरुद्ध होने, जलभराव या अन्य स्थानीय प्रशासनिक प्रतिबंध हो सकते हैं। नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से यह परेशानी बनी हुई है और इससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बाहर निकलना कठिन हो गया है। विशेष रूप से माताओं और बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें पूरी करना चुनौती बन गया है। इससे स्वास्थ्य और जीवन सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने और लोगों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक और सहायता टीमों को कॉलोनियों तक पहुंचाया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की परिस्थितियों में प्रशासन और नागरिकों के बीच समन्वय जरूरी है। स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। नागरिकों को मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है ताकि किसी भी तरह की आपात स्थिति में लोग सुरक्षित रहें।

स्थानीय लोग अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि घरों में कैद होने की समस्या जल्द से जल्द हल की जाए। उन्होंने कहा कि महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं और उनकी सुरक्षा तथा स्वास्थ्य की दृष्टि से तुरंत कदम उठाए जाने चाहिए।

इस प्रकार, जालोर की 5 कॉलोनियों में घरों में कैद रहने के कारण नागरिक विशेषकर महिलाएं और नवजात बच्चों वाली माताएं परेशान हैं। प्रशासन ने राहत और सहायता की बातें कही हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि वास्तविक सहायता तुरंत मिले, ताकि डिलीवरी के बाद बच्चों और माताओं के इलाज में कोई बाधा न आए।

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